महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने गुरुवार को धर्मांतरण विरोधी मसौदा विधेयक को मंजूरी दी, जिसके तहत जबरन धर्मांतरण के लिए सात साल की सजा और पाँच लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
भाजपा मंत्री नितेश राणे ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि यह कानून “हिंदू लड़कियों की जबरन शादी और धर्मांतरण” रोकेगा।
विधेयक के राज्य विधानमण्डल के चल रहे बजट सत्र में रखे जाने की संभावना है।
विधेयक में “गैरकानूनी” धर्मांतरण करवाने वाले संगठनों पर प्रतिबंध और दंडित करने के प्रावधान हैं जबकि व्यक्तियों के मामले में दोषी पाए जाने पर सात साल की सजा व पाँच लाख रुपये के जुर्माने के प्रावधान हैं। अपराध गैर जमानती होंगे और जबरन धर्मांतरण के आरोप लगने पर पुलिस को मामला दर्ज करने के अधिकार होंगे।
विधेयक पारित होने की सूरत में महाराष्ट्र उन कई भाजपा शासित राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां धर्मांतरण के खिलाफ कानून हैं।
मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस पहले दावा कर चुके हैं कि उनकी सरकार अंतरधर्मीय विवाहों के खिलाफ नहीं है लेकिन दबाव डालकर या गलत पहचान का इस्तेमाल कर और धर्मांतरण करवाने और प्रताड़ना देने के उद्देश्य से की गई शादियों के मामलों से प्रस्तावित कानून के तहत निबटा जाएगा।
कुछ ही दिन पहले भाजपा शासित पड़ोसी राज्य गुजरात में विवाह पंजीकरण कानून में अभिभावकों की मंजूरी का प्रावधान जोड़ा गया जिसकी काफी आलोचना हुई है। मुख्यमंत्री हर्ष सिंघवी ने कहा था कि “लव जिहाद” के नाम पर राज्य में खेल खेला जा रहा है और युवा लड़कियों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच बनाना होगा।”
करीब 12 राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून हैं और इनकी वैधता का मामला सुप्रीम कोर्ट में है और सुप्रीम कोर्ट केंद्र के अलावा हिमाचल प्रदेश, उड़ीसा, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड और राजस्थान को नोटिस जारी कर चुकी है।
(जनचोक ब्यूरो)